सांस्कृतिक मामलों का विभाग, केरल सरकार

सांस्कृतिक संस्थान


कायिक्करा का आशान मेमोरियल एसोसिएशन

20वीं शताब्दी में केरल में पुनर्जागरण काव्य की शुरुआत मलयालम भाषा में हुई और 1907 में कुमारन आशान के ‘वीणापूवु’ के साथ मलयालम में रोमांटिसिज्म (स्वच्छंदतावाद) का पुनर्जागरण आरंभ हुआ। वीणापूवु, नलिनी, लीला, श्री बुद्ध चरितम, चिंताविष्टयाया सीता, करुणा तथा अन्य अनेक कालजयी रचनाओं के लेखक थे एन. कुमारन आशान जिनका जन्म तिरुवनंतपुरम के चिरयिनकीष़ में कायिक्करा गांव में 12 अप्रैल 1873 को हुआ था। पल्लना नदी में हुई नौका दुर्घटना में जब कवि की मृत्यु तब वे 51 साल के थे।

आशान मेमोरियल एसोसिएशन का रजिस्ट्रेशन कायिक्करा में आर. शंकर के मुख्यमंत्रीत्वकाल में 1957 में हुआ था। 1971 में एक ऑडिटोरियम और एक ऑफिस भवन का निर्माण हुआ। 1973 में, कुमारन आशान के शताब्दी वर्षगांठ समारोह के दौरान एक लाइब्रेरी की स्थापना की गई।

एसोसिएशन का एक उल्लेखनीय कदम है आशान वर्ल्ड प्राइज (आशान विश्व पुरस्कार) की शुरुआत हुई (‘आशान’ उपाधि विद्वान व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होती है)। आशान वर्ल्ड प्राइज के विजेता विभिन्न देशों से चयनित किए जाते हैं। वह 35 साल की उम्र में ‘वीणापूवु’ का पहली बार प्रकाशन हुआ था। ये मलयालम साहित्य के इतिहास का एक मील का पत्थर है और इसका 100 वें वर्ष में मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन ने घोषणा की कि पुरस्कार की राशि 3 लाख रुपए कर दी गई है। इसी तरह, आशान का 125वीं वर्षगांठ भी बड़े धूमधाम से मनाई गई।