सांस्कृतिक मामलों का विभाग, केरल सरकार

सांस्कृतिक संस्थान


केरल लोक शिक्षा अकादेमी (केरल फोकलोर अकैडमी)




राज्य के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में काम करने वाली एक सांस्कृतिक संस्थान। इस अकादमी की स्थापना 1996 में लोक कलाओं की प्रशिक्षण देने और उनके विकास, प्रोत्साहन और संरक्षण हेतु किए जा रहे मौजूदा प्रयासों के सुनिश्चयन हेतु की गई थी। अकादमी का मुख्य लक्ष्य है केरल की विभिन्न लोक कलाओं की पहचान और उनका वर्गीकरण करना और साथ ही लोगों तक इनकी पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने में मदद करना। अकादमी के प्रथम अध्यक्ष थे श्री जी. भार्गवन पिल्लई। एम.वी. कण्णन, डॉ. एम.वी. विष्णुनम्बूतिरी, प्रोफेसर बी. मोहम्मद अहमद, पी.के. कालन तथा सी.जे. कुट्टप्पन वे जानी-मानी हस्तियां हैं जिन्होंने इस संस्थान के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया। मौजूदा अक्ष्यक्ष हैं प्रो बी. मोहम्मद अहमद।

वर्ष 2003 में, राज्य सरकार ने चिरक्कल स्थित चिरक्कल पैलेस को इस अकादमी के हवाले कर दिया ताकि यह भवन इसके मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जाए। बीते दिनों की याद दिलाने वाला यह खूबसूरत राजमहल अकादमी द्वारा यहां स्थापित किए गए संग्रहालय के लिए एकदम उपयुक्त स्थल साबित हुआ।

अकादमी के दो उपकेंद्र हैं - एक कोट्टयम जिले के वेल्लावूर में जिसे ट्रावनकोर फोकलोर विलेज (त्रावणकोर लोक शिक्षा गाँव) कहते हैं, और दूसरा पालक्काड जिले में कल्पात्ती में जिसमें मंदिर कला और परकशन आर्ट्स के अध्ययन और शोध केंद्र तथा परकशन वाद्ययंत्रों का एक संग्रहालय स्थापित है।

अकादमी एक त्रैमासिक पत्रिका निकालती है जिसका उद्देश्य है लोक शिक्षा/ लोक कलाओं के अध्ययन और शोध को बढ़ावा देना, और अकादमी में केरल की लोक शिक्षा के ऊपर 25 पुस्तकें प्रकाशित की हैं। अकादमी ने केरल के 100 कला रूपों के बारे में एक पुस्तक प्रकाशित की है और दो शब्दकोश भी, जिनमें से एक अभिनय कला चविट्टुनाटकम पर और एक ब्यारी भाषा के ऊपर है।

अकादमी लोक शिक्षा/लोक कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले कलाकारों और विशेषज्ञों को पुरस्कार और फेलोशिप भी प्रदान करती है। इस क्षेत्र में दिए गए विशिष्ट योगदानों को सम्मानित करने हेतु 2008 में अकादमी ने पी.के. कालन पुरस्कार की स्थापना की जिसकी पुरस्कार राशि एक लाख रुपए है।