सांस्कृतिक मामलों का विभाग, केरल सरकार


केरल कलामंडलम



19वीं शताब्दी के अंत तक कथकली, मोहिनीयाट्टम और केरल के ऐसे ही अन्य कला रूप मृतप्राय होने लगे थे। महान कवि वल्लत्तोल नारायण मेनोन और उनके अभिन्न मित्र मणक्कुलम मुकुंदा राजा के प्रयासों से इन पारंपरिक कला रूपों को गति प्राप्त हुई। संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ वर्षों की उनकी कड़ी मिहनत और अध्यवसाय के परिणामस्वरूप तृश्शूर जिले में भारतप्पुष़ा नदी के किनारे चेरुतुरुती गांव में केरल कलामंडलम की स्थापना हुई। कलामंडलम ने अपना काम-काज 9 नवंबर 1930 को कुन्नमकुलम में कक्काड कारणवप्पाड के मडप्पाड गृह में शुरू किया। कुछ ही समय बाद मुख्यालय को तृश्शूर जिले में मुलंगुन्नत्तुकाव के पास अंबलपुरम गांव के श्रीनिवासम बंगलो में स्थानांतरित किया गया। 1936 में अपने प्राशसकीय अनुभाग और प्रशिक्षण सुविधा के साथ कलामंडलम चेरुतुरुती में कार्यशील हुआ।

शुरुआत में कोच्ची और केरल सरकार के अधीन काम शुरु करने वाला कलामंडलम अब केरल सरकार के संस्कृति विभाग के तहत काम करता है। कथकली, मोहिनियाट्टम, कूटियाट्टम, तुल्लल, चुट्टी, चमयम, मृदंगम, मिषावु, कर्नाटक संगीत, वाद्ययंत्र संगीत (केरल का) और ऐसे ही अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। साथ ही, कलामंडलम के पास प्रदर्शन के लिए अपने कलाकारों की मंडली होती है।

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