सांस्कृतिक मामलों का विभाग, केरल सरकार

सांस्कृतिक संस्थान


केरल संगीत नाटक अकादमी


राज्य के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में काम करने वाली एक सांस्कृतिक संस्थान।

इस अकादमी की स्थापना तृश्शूर जिलें में 26 अप्रैल 1958 को की गई थी जिसका उद्देश्य था नृत्य, संगीत, नाट्यशास्त्र, मंदिर कलाओं, आनुष्ठानिक कलाओं, जादू और कथाप्रसंगम (कथा वाचन) को समर्थन और प्रोत्साहित करना। केरल के प्रथम मुख्यमंत्री ई. एम. एस. नम्बूतिरीपाड और आलोचक तथा शिक्षा मंत्री जोसफ मुंडश्शेरी के नेतृत्व में यह अकादमी स्थापित हुई थी और तात्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया।

शुरू में यह अकादमी साहित्य की अकादमी के साथ चलती थी लेकिन बाद में इसे 1982 में अपने खुद का भवन प्राप्त हुआ। 1998 में तृश्शूर में, जहां इसका मुख्यालय है रहने के लिए अतिथि कलाकारों के लिए आर्टिस्ट कॉटेज का निर्माण हुआ। अकादमी की एक रिफरेंस लाइब्रेरी (संदर्भ पुस्तकालय) भी है जिसका निर्माण समाज सुधारक एम.आर.बी. के नाम पर किया गया, और तिरुवनंतपुरम के वैलोप्पिल्ली संस्कृति भवन में एक क्षेत्रीय कार्यालय जिसे काम के बढ़ते बोझ से निबटने के लिए 2006 में स्थापित किया गया था।

संगीत के उस्ताद मंकु तंपुरान इस अकादमी के प्रथम अध्यक्ष थे और पी.के. नंबियार इसके प्रथम सचिव। अध्यक्ष पद को सुशोभित करने वाली अन्य हस्तियों में शामिल थे जी. शंकरा पिल्लई, वैक्कम चंद्रशेखरन नायर, टी. आर. सुकुमारन नायर, डॉ. के. जे. येसुदास, के. टी. मोहम्मद, तिक्कोडियन, कावालम नारायण पणिक्कर, सी. एल. जोस, भरत मुरली और मुकेश।

अकादमी ने जी. शंकरा पिल्लई के नेतृत्व में शास्तांकोट्टा, तृश्शूर और नीलेश्वरम में नाटक शिविर (ड्रामा कैंप) आयोजित कर केरल के सांस्कृतिक परिदृश्य के ऊपर अपनी छाप और कावालम, अडूर गोपालकृष्णन, गोपी, नेडुमुडी वेणु, अरविंदन, जगन्नाथन, पी. के. वेणुकुट्टन नायर, रामानुजम और वयलार वासुदेवन पिल्लई जैसे समर्पित कलाकारों ने नाट्यशास्त्र के क्षेत्र में विविध गतिविधियों का संचालन किया।

1988 में, अकादमी के निर्देशन में एक जिला कला परिषद (डिस्ट्रिक्ट्स आर्ट्स एसोसिएशन) का गठन किया गया। इसके इतिहास की अन्य उपलब्धियों में शामिल हैं 1990 में मोहिनियाट्टम के कलाकारों के लिए एक कैंप का आयोजन, 1998 में महिलाओं के लिए एक ड्रामा वर्कशॉप का आयोजन, चेन्नई और कोलकाता में पहली बार 2006 में कार्यक्रमों का आयोजन और 2007 में तृश्शूर में लोक एवं जनजातीय उत्सव का आयोजन।

कलाकारों के लिए मॉडल रीजनल थिएटर, तोप्पिल भासी नाट्यगृहम, मुरली थिएटर, दक्षिणमूर्ति वनज्योत्सना थिएटर, सी. जे. थॉमस कॉन्फ्रेंस हॉल और एम.आर.बी लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं के अलावा अकादमी अपने मुख्य भवन में पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) के लिए स्थान भी मुहैया करती है। इस भवन में चेंबई डिजिटल आर्काइव्स, चेंबई म्यूजियम और जोस चिरम्मल म्यूजियम स्क्वायर भी स्थित हैं।

1963 में, अकादमी के मुखपत्र ‘केली’ नामक पत्रिका शुरू की गई। अकादमी की ओर से कई सारे पुरस्कार दिए जाते हैं जिनमें प्रमुख हैं- स्वातिपुरस्कारम, एक लाख रुपए का एस.एल. पुरम सदानंदन नाटक पुरस्कारम जो क्रमशः शास्त्रीय संगीत और नाटक के क्षेत्र में प्रदान किए जाते हैं। स्टेट अमैट्योर ड्रामा प्राइज, स्टेट प्रोफेशनल ड्रामा अवार्ड और प्रवासी अमैट्योर ड्रामा अवार्ड की भी स्थापना अकादमी द्वारा की गई।

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