सांस्कृतिक मामलों का विभाग, केरल सरकार


केरल राज्य अभिलेखागार विभाग (केरल स्टेट आर्काइव्स डिपार्टमेंट)

अभिलेख (आर्काइव) जो एक अनजाने इतिहास के प्रति आपकी आंखें खोल दे, एक ऐसा इतिहास जो आपकी स्मृति में दफ्न है; प्राचीन काल का एक समृद्ध संग्रह ताकि आप वर्तमान को समझ सकें।

परिचय
केरल राज्य अभिलेखागार विभाग एक स्वतंत्र निकाय है जिसकी स्थापना सन 1962 में हुई थी। विभाग के पूर्ववृत्तों को 1887 के तिरुवितांकूर हुसूर वर्नाक्युलर रिकॉर्ड्स और 1901 में कोचीन में बने सेंट्रल रिकॉर्ड में देखा जा सकता है। सन 1958 में ईएमएस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान तुरुवनंतपुरम में आयोजित भारतीय ऐतिहासिक अभिलेख आयोग (इंडियन हिस्टोरिकल रिकॉर्ड्स कमीशन) की 34वीं बैठक में, इस बात की अनुशंसा की गई थी कि ऐसे विभागों की स्थापना के लिए भारत के सभी राज्यों को आगे आना चाहिए।

यह राज्य अभिलेखागार विभाग (स्टेट आर्काइव्स डिपार्टमेंट) को राज्य सरकार और अन्य विभागों के स्थायी महत्व के रिकॉर्ड को इकट्ठा करने और संरक्षित करने का अधिकार प्रदान करता है।

विभाग के मुख्य कार्यों में शामिल हैं अभिलेखागार (आर्काइव्स) में प्राप्त रिकॉर्ड्स की कस्टडी, देखभाल और प्रबंधन, ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेज हासिल करना, विभिन्न विभागों और संस्थानों को रिकॉर्ड्स को प्रबंधित और संरक्षित करने के लिए तकनीकी सलाह और सहायता प्रदान करना, अभिलेखीय सामग्रियों का प्रकाशन करना, प्रदर्शनियों, सेमिनारों द्वारा लोगों के बीच पुराभिलेखीय सामग्रियों के बारे में जागरूकता फैलाना, ऐतिहासिक अनुसंधान, साथ ही प्रशासन के सुचारू संचालन के लिए सरकार को ऐसी सामग्रियां प्रदान करना। आज, अभिलेखागार विभाग एक ऐसा खजाना है जो सामान्य रूप से व्यापक अकादमिक समुदाय और विशेषकर शोधकर्ताओं की आवश्यकताओं को पूरा करता है।