सांस्कृतिक मामलों का विभाग, केरल सरकार

सांस्कृतिक संस्थान


प्रोफेसर एन. कृष्ण पिल्लई मेमोरियल कल्चरल सेंटर (प्रोफेसर एन. कृष्ण पिल्लई स्मारक सांस्कृतिक केंद्र)

साहित्य के क्षेत्र में एक विशिष्ट धारा के प्रणेता प्रोफेसर एन. कृष्ण पिल्लई मलयालम नाटक के मूर्धन्य विद्वान थे। उनका जन्म 22 सितंबर 1916 को आट्टिंगल के कक्काट्टुमठत्तिल केशवन और वर्कला के चेक्काला विलाक्कत्तु वीट्टिल पार्वति अम्मा के पुत्र के रूप में हुआ था। 1938 में बीए ऑनर्स करने के बाद उन्होंने अपना करियर हाई स्कूल शिक्षक (मलयालम) के रूप में वरकला के शिवगिरि में आरंभ किया। बाद में वह तिरुनेलवेली के हिंदू कॉलेज और तिरुवनंतपुरम के यूनिवर्सिटी कॉलेज में व्याख्याता के रूप में और तलश्शेरी के गवर्नमेंट ब्रण्णन कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में और फिर इंटरमीडिएट कॉलेज तिरुवनंतपुरम में प्राचार्य की हैसियत से काम किया। 1985 में वह सेवानिवृत्त हुए।

एन. कृष्ण पिल्लई ने भग्नभवनम, कन्यका, बलाबलम, दर्शनम, अनुरंजनम, मुडक्कुमुतल, अषिमुखत्तेक्कु जैसे नाटकों की रचना की। उनके सभी नाटक मानवीय संबंधों के संघर्षों को बड़े सुंदर तरीके से दर्शाते हैं। प्रस्तुत नाटक बुद्धिवाद/तर्कवाद पर आधारित थे। प्रोफेसर एन. कृष्ण पिल्लई को केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया।

तिरुवनंतपुरम स्थित प्रोफेसर एन. कृष्ण पिल्लई मेमोरियल कल्चरल सेंटर इस महान शिक्षक और साहित्यकार की स्मृतियों को संजोने का महती प्रयास है। यह सेंटर पालयम के नलंदा में केरल सरकार द्वारा आवंटित भूमि पर स्थापित है। सेंटर की दैनिक गतिविधियों का संचालन एक समिति द्वारा की जाती है जिसके प्रमुख विख्यात कवि प्रो. ओएनवी कुरुप्प हैं। इस भवन में 250 लोगों के बैठने की क्षमता वाला एक मिनी थिएटर और 8000 से अधिक टाइटल्स वाली एक लाइब्रेरी है। ये लाइब्रेरी - एन. कृष्ण पिल्लई मेमोरियल लाइब्रेरी एक शोध केंद्र है।

बच्चों के हित में इस सेंटर में ‘नन्दनम बालवेदी’ नामक एक फोरम चलाया जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य है राज्य के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में बच्चों के बीच चेतना जगाना।