सांस्कृतिक मामलों का विभाग, केरल सरकार


चित्रकारी



केरल की प्राचीन चित्रकला का मूल इसकी गुफा चित्रकारी और उत्कीर्णन में निहित है। प्राचीन भित्तिचित्र मंदिर जैसे उपासना स्थलों पर प्रमुख रूप से दिखाई पड़ते हैं। आनुष्ठानिक कला- कलामेजुत्त, जिसमें फर्श पर रंगबिरंगे पाउडर की मदद से देवी-देवताओं के चित्र बनाए जाते हैं, केरल की चित्रकारी की एक अन्य पद्धति है। लोक चित्रकला तकनीकों की खास विशेषताएं इन आनुष्ठानिक कला रूपों में देखी जा सकती हैं। आधुनिक कला शैलियां आधुनिक भारतीय कला के प्रणेता कहे जाने वाले राजा रवि वर्मा के पेंटिंग्स के जरिए प्रचलित हुईं।

कई आधुनिक कलाकार हुए हैं जिनमें शामिल हैं ये प्रसिद्ध नाम- सी. राजराजावर्मा, मंगलाबाई तम्पुराट्टि, के. रामवर्माराजा, के. माधव मेनोन, वी.एस. वलियत्तान, सी.वी. बालन नायर, पी.जे. चेरियान, के.सी.एस. पणिक्कर, सी.के. रा, एम.वी. देवन, के.वी. हरिदासन, ए.सी.के. राजा, पी.आई. इट्टूप, एम. रामन, टी.के. पद्मिनि, पी. गंगाधरन, ए. रामचंद्रन, अक्कित्तम नारायणन और पारिस विश्वनाथन। प्राचीन मूर्तिकला की उत्कृष्टता काष्ठ, पाषाण/धातु की मूर्तियों, दीपकों और पात्रों में साफ-साफ दिखाई पड़ती है। यद्यपि बेहतरीन काष्ठ मूर्तियां और प्रतिमाएं मंदिरों में दिखाई पड़ती हैं, प्राचीन मूर्ति कला के कौशल प्राचीन चर्चों में दिखाई पड़ते हैं। आधुनिक मूर्तिकला के क्षेत्र में केरल ने अनेक प्रवीण कलाकार दिए हैं, जैसे- कानाई कुन्हिरामन, एन.एन. रिमसण तथा अन्य।