सांस्कृतिक मामलों का विभाग, केरल सरकार


प्रदर्शन कलारूप

केरल की विरासत में प्रदर्शन कलाओं का विशिष्ट स्थान है। विभिन्न कला रूप स्थानीय संस्कृति के साथ गुंथे हुए और उनमें लोक जीवन की झलक मिलती है; ये कला रूप केरल की समृद्ध संस्कृति से उद्भूत हुए हैं।

संस्कृत नृत्य-नाट्य के केरल संस्करण कूटियाट्टम से लेकर कथकली, केरल नटनम और अन्य क्लासिकल कला रूपों तक केरल की विविध प्रदर्शन कलाओं को प्रस्तुत करने का एक गंभीर प्रयास किया गया है। कलामेजुत्तु, सर्पम तुल्लल, तेय्यम को अभी भी बिना उनके मूल स्वरूप और आकर्षण को खोए सुरक्षित रखा गया है। वेलकलि केरल की प्राचीन युद्धकला में रुचि को दर्शाती है। आदिवासियों या जनजातियों की कलाओं के साथ मिलकर सभी शास्त्रीय और आनुष्ठानिक कला रूप दृश्य और श्रव्य दोनों रूपों में मौजूद हैं। ये कला रूप हर दृष्टि से कालातीत है, यानि अपनी विशिष्टता में स्थान और काल से परे।