सांस्कृतिक मामलों का विभाग, केरल सरकार

सांस्कृतिक संस्थान


केरल साहित्य अकादमी

ज्यादातर स्वयंसेवी आधार पर काम करने वाले कला और साहित्य प्रेमियों के लिए 12 मार्च 1954 को साहित्य अकादेमी (नेशनल अकैडमी ऑफ लेटर्स) की स्थापना नई दिल्ली में की गई।

साहित्य के राष्ट्रीय मानदंडों को ऊंचा उठाने का महती लक्ष्य प्राप्त करने के लिए स्थानीय साहित्य को बड़ी मिहनत के साथ संवर्धित करने की जरूरत है ताकि यह सतत रूप से विकास करने या सतत रूप से समृद्ध होने में सक्षम हो। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु केंद्र द्वारा राज्यों को दी गई सहायता द्वारा प्रोत्साहित, केरल साहित्य अकादमी की स्थापना पूर्व ट्रावणकोर-कोचीन की सरकार द्वारा 15 अगस्त 1956 को की गई थी। यह देश का पहला क्षेत्रीय साहित्य अकादमी थी। अकादमी का उद्घाटन 15 अक्टूबर 1956 को महाराजा श्री चित्तिरा तिरुनाल बालराम वर्मा ने राजधानी तिरुवनंतपुरम के कनकक्कुन्नू पैलेस में किया था।

उसी साल पहले नवंबर को वह दिन आया जब केरल एक अलग राज्य बना, प्रशासनिक कार्यों की शुरुआत उत्तरी केरल या मलबार क्षेत्र से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होने के बाद हुई। प्रथम महासभा की बैठक अगले वर्ष 23 मार्च को आयोजित हुई।

अनेक महत्वपूर्ण मलयालम लेखकों का इस अकादमी के संचालन में भूमिका रही है।

लाइब्रेरी (पुस्तकालय)
अकादमी की संपदाओं में निःसंदेश सबसे महत्वपूर्ण है किताबों का इसका विशाल संग्रह। समकालीन रुचि और अपेक्षाओं के अनुरूप एक डिजिटल लाइब्रेरी की शुरुआत 2008 में की गई। पुस्तकालय सदस्यों (लाइब्रेरी मेंबर्स) को स्थानीय लाइब्रेरी नेटवर्क, इंटरनेट कनेक्टिविटी, दुर्लभ मूल्यवान किताबों के डिजिटल संस्करण, ई-जर्नल आदि के सुविधाएं मिलती हैं।

2500 दुर्लभ पुस्तकों और रसिकरंजिनी, मंगलोदयम, लक्ष्मीबाई, समस्ता केरल साहित्य परिषद, उण्णी नम्बूतिरी, विध्यविनोदिनी, कैरली, विवेकोदयम, आत्मपोषिणी, राजश्री, कवनकौमुदी, भाषापोषिनी (पुरानी), सत्यनाथकाहलम, स्वदेशाभिमानी, साहित्य तिलक, मितवादी, चरक संहिता, प्रबुद्ध केरलम और जयकेरलम जैसी शुरुआती मलयालम पत्र-पत्रिकाओं के डिजिटाइजेशन का एक प्रॉजेक्ट चल रहा है। इससे पाठकों को ई-बुक्स और ई-जर्नल का एक बेहतरीन संग्रह उपलब्ध होगा। अकादमी में दिवंगत साहित्यिक हस्तियों के ऑयल पोर्ट्रेट की एक प्रदर्शनी पर भी काम चल रहा है।

वर्तमान में, संक्षिप्त जीवनी विवरणों, तस्वीरों, हस्तलिखित नोट्स, प्रकाशनों की सूची और उनकी प्रदर्शनियों की चुनिंदा कृतियों के साथ 250 दिवंगत साहित्यकर्मियों का एक इंटरैक्टिव सीडी अकादमी द्वारा उपलब्ध कराया जाता है।

1976 में, अप्पन तंपुरान मेमोरियल को अकादमी के मार्गदर्शन के तहत लाया गया। मई 2013 में, डॉ. अषीकोड मेमोरियल की जिम्मेदारी उठाने वाली राज्य सरकार ने अकादमी को इसका प्रबंधन सौंप दिया।

संकलन, डिजिटाइजेशन और साहित्यिक हस्तियों के योगदानों को दर्शाने वाली प्रदर्शनी के आयोजन के अलावा, अकादमी ने विभिन्न पुस्तकों के प्रकाशन का कार्य भी सफलतापूर्वक किया है। इनमें से कई पुस्तकों ने राज्य की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और उसने समुन्नयन में अनमोल योगदान दिए हैं।

इनमें उल्लेखनीय हैं केरल भाषा गानंगल - तीन खंड, पत्तोम्बताम नूट्टांडिले केरलम, साहित्यकार डायरेक्टरी, केरलत्तिले पाक्षिकल, नम्मुडे साहित्यम नम्मुडे समूहम - चार खंड, अमरकोशम, परमेश्वरी व्याख्यानम, के.टी युडे नाटक समाहारम, सी.जे युडे नाटकंगल, साहित्यचरित्रंगल (कविताओं, उपन्यासों, लघु कथाओं और नाटकों का साहित्यिक इतिहास), अरबी अंग्रेजी मलयालम कैटलॉग (सूचीपत्र), कौटिल्या रचित अर्थशास्त्रम, तुंच्चत्त एषुत्तच्चन कृत अध्यात्म रामायणम और कुंचन नंबियार कृत तुल्लल कृतिकल। 1976 में साहित्यचक्रवालम पत्रिका की शुरुआत हुई।

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