सांस्कृतिक मामलों का विभाग, केरल सरकार

सांस्कृतिक संस्थान


तुन्चन मेमोरियल ट्रस्ट एवं रिसर्च सेंटर (तुन्चन स्मारक ट्रस्ट एवं अनुसंधान केन्द्र)



तुन्चन स्मारकम (मेमोरियल) की स्थापना मलयालम भाषा के प्रणेता तुन्चत्तु एषुत्तच्चन की स्मृति में की गई। मेमोरियल की स्थापना 1964 में तुन्चत्तु एषुत्तच्चन के विचारों के प्रसार हेतु की गई थी। एक सांस्कृतिक संस्थान के रूप में यह स्मारक मलप्पुरम जिले के तिरुर स्थित तुन्चन परंबु में है।

1906 में, तुन्चन परंबु में आचार्य के लिए एक स्मारक स्थापित करने के उद्देश्य से महाराजा मानविक्रम एट्टन तंपुरान की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में एक हजार लोगों ने हिस्सा लिया। पुनः स्मारक के निर्माण के लिए गंभीर विचार हेतु 1954 में के.पी. केशव मेनोन की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। साहित्य प्रेमियों ने इस इस बैठक में भाग लिया। लोगों के योगदानों और सरकारी फंड से 4 एकड़ 60 सेंट जमीन खरीदी गई। स्मारक का शिलान्यास 1961 में केरल के मुख्य मंत्री पट्टम ताणु पिल्लई ने किया। स्मारक का उद्घाटन 15 जनवरी 1964 को किया गया। अक्टूबर 1964 में ग्यारह सदस्यीय एक कमिटी गठित की गई। इसके साथ, तिरुर के तुन्चन परंबु को केरल के सांस्कृतिक इतिहास में स्थान मिला। के.पी. केशव मेनोन के बाद एस.के. पोट्टेक्काड, टी. एन. जयचंद्रन, एम.एस. मेनोन जैसे प्रसिद्ध हस्तियों ने इस स्मारक की अध्यक्षता की। 1993 में, एम.टी. वासुदेवन नायर इसके अध्यक्ष बने।

आज, तुन्चन मेमोरियल में एक सुसज्जित शोध केंद्र, मलयालम साहित्य म्यूजियम, पाम लीफ लाइब्रेरी, मीटिंग के लिए एक आडिटोरियम, ओपन-एयर स्टेज, गेस्ट हाउस, रेस्ट रूम, खुली जगह, सरस्वती मंडपम और बाल पुस्तकालय है।

शोध केंद्र का शुभारंभ 1998 में हुआ जिसे कालीकट यूनिवर्सिटी ने अनुमोदित शोध केंद्र के रूप में मान्यता दी।

2008 में मलयालम भाषा के प्रथम म्यूजियम की शुभारंभ तुन्चन परंबु में हुआ।

हर साल फरवरी महीने के पहले सप्ताह में पांच दिन तुन्चन समारोह का आयोजन होता है। कार्यक्रमों में शामिल हैं राष्ट्रीय सेमिनार, दक्षिण भारतीय काव्य उत्सव, विभिन्न राज्यों के साहित्यकारों का सम्मलेन और उसके दोस्ताना बहस, पुस्तक मेला, प्रदर्शनी, विविध मनोरंजन आदि।

तुन्चन स्मारकम के बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए यहां क्लिक करें